उज्जैन। सनातन धर्म के सबसे बड़े और पवित्र समागम ‘सिंहस्थ महाकुंभ’ की प्रतीक्षा कर रहे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन ने वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया है।
बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) एक बार फिर उस दिव्य क्षण की गवाह बनने जा रही है, जिसका इंतजार हर 12 साल बाद भक्तों को रहता है। आइये जानते हैं इस महापर्व से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।
🗓️ मुख्य तिथियां: कब से कब तक?
प्रशासनिक घोषणा के अनुसार, सिंहस्थ महापर्व का आयोजन मुख्य रूप से दो महीनों तक चलेगा:
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प्रारंभ तिथि: 27 मार्च 2028
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समापन तिथि: 27 मई 2028
🌊 शाही स्नान की तारीखें (Shahi Snan Dates)
सिंहस्थ का सबसे मुख्य आकर्षण ‘शाही स्नान’ होता है, जिसमें विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत सबसे पहले क्षिप्रा नदी के पावन जल में डुबकी लगाते हैं। 2028 के लिए प्रस्तावित शाही स्नान की तारीखें इस प्रकार हैं:
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पहला शाही स्नान: 9 अप्रैल 2028 (चैत्र पूर्णिमा)
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दूसरा शाही स्नान: 23 अप्रैल 2028 (वैशाख कृष्ण अमावस्या/मेष संक्रांति के निकट)
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तीसरा शाही स्नान: 8 मई 2028 (वैशाख शुक्ल पूर्णिमा)
नोट: इन मुख्य तारीखों के अलावा पूरे दो महीने तक अलग-अलग ‘पर्व स्नान’ चलते रहेंगे, जिनमें देशभर से आने वाले श्रद्धालु पुण्य लाभ कमा सकेंगे।
✨ क्यों खास है 2028 का सिंहस्थ?
इस बार का सिंहस्थ पहले के मुकाबले कहीं अधिक भव्य होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इसे ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी’ के रूप में विकसित कर रही है।
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14 करोड़ श्रद्धालुओं का अनुमान: इस बार प्रशासन लगभग 14 करोड़ भक्तों के आने की तैयारी कर रहा है, जो 2016 के मुकाबले लगभग दोगुना है।
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स्थायी बुनियादी ढांचा: इस बार टेंट सिटी के साथ-साथ कई स्थायी निर्माण किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में भी उज्जैन आने वाले यात्रियों को सुविधा मिले।
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धार्मिक सर्किट: उज्जैन को इंदौर, ओंकारेश्वर, महेश्वर और मांडू के साथ जोड़कर एक विशाल ‘धार्मिक-आध्यात्मिक सर्किट’ बनाया जा रहा है।
🕉️ सिंहस्थ की कहानी: क्षिप्रा तट पर अमृत की बूंदें
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से अमृत कलश निकला। इस कलश को लेकर जब छीना-झपटी हुई, तो अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरीं— प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन।
उज्जैन में अमृत की बूंदें मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी में गिरी थीं। संयोगवश, जब बृहस्पति (गुरु) सिंह राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तब यहाँ ‘सिंहस्थ’ का योग बनता है। माना जाता है कि इन विशेष तिथियों पर क्षिप्रा में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बनता है।
🚩 श्रद्धालुओं के लिए ‘कंप्लीट गाइड’
अगर आप भी 2028 में सिंहस्थ जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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रजिस्ट्रेशन: भीड़ नियंत्रण के लिए इस बार डिजिटल पास या रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था हो सकती है।
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84 महादेव दर्शन: सिंहस्थ के दौरान उज्जैन के प्रसिद्ध ’84 महादेव’ मंदिरों के दर्शन का विशेष महत्व है।
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अखाड़ा दर्शन: संतों की जीवनशैली और उनकी साधना को समझने के लिए अखाड़ों में जाना एक अद्भुत अनुभव होता है।
निष्कर्ष: सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। बाबा महाकाल की छाया में क्षिप्रा के तट पर होने वाला यह आयोजन हर भक्त के जीवन में एक नई ऊर्जा भर देता है।
क्या आप 2028 के इस महाकुंभ का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं!


